Choose Life, Not Tobacco         |         Smoking is a habit that drains your money and kills your slowly, one puff after another….         |         Smoking helps you to relax… in Death-bed         |         Smoking is injurious not only to you, but for the ones around you also… Quit before it’s late         |         Smoking Leaves an Unseen Scar, it fill your Insides with Toxins and Tar         |         Only a fool would put his lips, at the other end of a burning fie.         |         Irony is, Tobacco companies kill their Best Customers.         |         You’re a Fool, if you think smoking is cool.         |         Tar the Roads, not your lungs.         |         Be brighter, put down the lighter.         |         Put the smoke out, before it put you Out.         |         Who’s going to retire on your hard-earned dollars… You or some tobacco company executive?         |         A Friend in Deed won’t make you smoke that weed.         |         Smokers die young, be smart, don’t start.         |         Every time you light up A cigarette, you are saying that your life isn’t worth Living….        |         Don’t let being on a ventilator ultimate become, the reason you eventually quit smoking. Save lungs while you can.         |         If you can’t stop smoking…. Cancer will.         |         Cigarettes are like Squirrels. They are perfectly harmless until you put one in your mouth and light it on fire.

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11 राज्यों ने गुटका एवं पान मसाले पर प्रतिबन्ध लगाना आवश्यक क्यों समझा

10 सितम्बर, 2012, मुम्बई: मिलिये 28 वर्ष के राजकमल प्रजापति से, जो नौकरी करने के साथ साथ बी.एड. की पढाई भी जारी रखे हुए है। वे विवाहित हैं और उनकी दो बेटियाँ हैं, राजकमल उत्तर प्रदेश के नामालूम से जालौन जिले के उरई कस्बे में रह रहे थे जब तक वे कैंसर की चपेट में नहीं आए थे। इस समय राजकमल मुम्बई के टाटा मेमोरिअल अस्पताल में हैं जहां पर उनकी जीभ और टॉन्सिल के काफी भागों को 26 अगस्त 2012 को हटा दिया गया। अब वे रेडियो थेरेपी की चुनौतियों का सामना करने के साथ फिर से बोलना सीख रहे हैं। यह पिछले केवल तीन सालों में उनके लिए गुटखा चबाने और सिगरेट पीने का नतीजा है!

Rajkamal Prajapati of Uttar Pradesh, Gutka Addiction Victim, oral cancer patient

उरई, उत्तर प्रदेश के राजकमल

राजकमल से विपरीत कोलकता में दिहाड़ी करने वाले 65 साल के मजदूर रमेश चौधरी, लगभग चालीस सालों से खैनी खा रहे थे और बीडी पी रहे थे; उनकी पत्नी सविता ने भी शादी के बाद से इसे नियति मां समझकर स्वीकार कर लिया। उन्हें हाल ही में स्वरयंत्र का कैंसर पता चला। दो सप्ताह पहले उनकी घबराई पत्नी सविता उन्हें मुम्बई लेकर आई क्योंकि वह बडी कठिनाई से सांस ले पा रहे थे। 27 अगस्त को टाटा मेमोरिअल के सर्जन ने उसका स्वरतंत्र हटा दिया और अब वह अपने गले में किये छेड़ से सांस लेता है और भविष्य की ओर चिंतिंत रहता है।

Ramesh Chowdhury, Chewable Tobacco Gutka & Bidi victim, Kolkata at Tata Memorial Hospital

कोलकता के रमेश और सविता चौधरी

सविता और राजकमल ने मुख्यमंत्री – ममता बनर्जी तथा अखिलेश यादव – को गुटखे पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक चिट्ठी लिखी। कई तम्बाकू पीड़ित भी अब ”वोईस ऑफ़ टोबॅको विक्टिम्स” जो कैंसर सर्जन, अस्पतालों तथा गैर सरकारी संगठनों का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क है, द्वारा प्रोत्साहित होकर मुख्यमंत्रियों तथा सांसदों को पत्र लिख रहे हैं।

कुछ कैंसर सर्जन अपनी पूरी ज़िंदगी में जीभ, जबड़े, स्वरयंत्र तथा तम्बाकू खाने वालों के छाती के अंगों को निकल कर थक चुके हैं जिससे व्यक्ति शारीरिक तथा सामाजिक रूप से विकलांग हो जाता है, जबकि मुनाफ़ा कमाने वाली तम्बाकू कंपनियां उन्हें जहर खिलाना जारी रखे हुए हैं। वे इस तथ्य को पचा नहीं पाते कि अपने पेशे के चक्कर में वे कितनी संख्या में अपंग व्यक्ति पैदा कर रहे हैं।

सर्जन इस तथ्य पर भरोसा ही नहीं कर पा रहे हैं कि आज मुंह से होने वाला कैंसर, इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है, यह देश में कैंसर से पीड़ित 42% पुरुषों की मृत्यु का वहीं 18.5% महिला कैंसर पीड़ितों की मृत्यु का कारण बना। ये आंकड़े एक विख्यात चिकित्सीय पत्रिका द लैंसेट में अग्रणी भारतीय सर्जनों द्वारा प्रकाशित एक अनुसंधान पेपर के अनुसार पुरुषों में 84,000 मौतों तथा महिलाओं में 36,000 मौतों की भयावह तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। इस मिथक के विपरीत कि धुआं रहित तम्बाकू सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक होती है, यह अध्ययन बतलाता है कि फेफड़े के कैंसर से होने वाले मौतों की तुलना में तम्बाकू से होने वाकी मौतों की संख्या दोगुनी है।

और चूंकि मुंह का कैंसर केवल एक ही मुख्य बीमारी है जिससे तम्बाकू चबाने वाले पीड़ित होते हैं, आंकड़े बतलाते हैं कि तम्बाकू से संबंधित मृत्यु तथा अक्षमताएं उपरोक्त आंकड़ों से कई गुना है।

लगभग 19,000 व्यक्ति भोपाल गैस शोकपूर्ण घटना में मारे गए। तम्बाकू से होने वाली मौतें इन आंकड़ों को भी पार करती हैं। यह बहुत ही खतरनाक तथ्य है कि गुटखा, पानमसाला और ऐसे ही कई उत्पाद हर माह पर एक भोपाल गैस शोकपूर्ण घटना के समान होते हैं, या एक भयानक हवाई दुर्घटना रोज के समान। इन उत्पादों को अपना चेहरा देने वाले मलाइका अरोड़ा और संजय दत्त जैसे खूबसूरत लोगों से एकदम विपरीत, ये सर्जन मृत और मरते लोगों को देखते हैं या उन लोगों को जिनकी ज़िंदगी बचाने के लिए उनके जबड़े, जीभ या गालों को हटा दिया है।

अब पूरे भारत में 47 चिकित्सीय पेशेवरों का एक नेटवर्क है जो गुटखा, पानमसाला और अन्य जहरीले उत्पादों को सड़क से फेंकने के लिए कटिबद्ध है और उन्हें इतिहास की किताबों या अजायबघर में में ही रखे जाने के लिए कुछ भी करने के लिए प्रतिबद्ध है। कुछ संपर्क विवरण दिए हैं: http://tiny.cc/Anti-Tobacco-Surgeons

कैंसर सर्जनों की आँखों के माध्यम से और तस्वीरें: http://tiny.cc/Cancer-surgeons-gutka

Gutka Tobacco Zarda Chaini Khaini Baba RMD Sanjay-Dutt Malaika Glamour

What the Common Man thinks of Gutka or Chewing Tobacco — Celebs like Sanjay Dutt Malaika

Gutka Tobacco Zarda Chaini Khaini Baba RMD Cancer

What a Cancer Surgeon sees about Gutka Zarda Khaini & other forms of chewing tobacco


कैंसर सर्जन अब अपनी पूरी ताकत हर राज्यों से इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने पर कर रहे हैं। और नतीजे दिख भी रहे हैं। कड़ी राजनीतिक इच्छा शक्ति का परिचय देते हुए 11 प्रदेश और एक केन्द्र शासित प्रदेश ने गुटखा और अन्य तम्बाकू से संबंधित उत्पाद प्रतिबंधित कर दिए हैं। ये हैं : मध्य प्रदेश, केरल, बिहार, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात और पंजाब तथा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ। दिल्ली प्रशासन भी दिल्ली उच्च न्यायालय के प्रति प्रतिबद्ध है कि वह कुछ दिनों में उचित निर्णय लेगा।

कुछ प्रतिबंध आदेशों को पढ़े http://tiny.cc/State-Tobacco-Bans

चबाने योग्य तम्बाकू पर प्रतिबंध का कानूनी आधार:

  1. स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 1 अगस्त 2011को जारी अधिसूचना के बिंदु 2.3.4 (भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक प्राधिकरण) में कहा गया है “उत्पादों में कोई भी ऐसा पदार्थ नहीं होना चाहिए हो स्वास्थ्य के प्रति हानिकारक हो: तम्बाकू और निकोटीन को किसी भी खाद्य प्रदार्थ का हिस्सा नहीं बनना चाहिए” इस प्रकार सभी धुंआ रहित तम्बाकू उत्पादजैसे गुटका, खैनी आदि पर प्रतिबंध लगना चाहिए। यह भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 के अनुसार हैं तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक प्राधिकरण, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत हैं।

  2. उच्चतम न्यायालय में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राष्ट्रीय संस्थान द्वारा जमा की गई रिपोर्ट भारत में धुँआ रहित तम्बाकू की वजह से होने वाली हज़ारों लोगों की मृत्यु की भयावह तस्वीर को प्रस्तुत करती है। ये सभी बीमारियाँ केवल ऐसे उत्पादों की बिक्री के प्रतिबंध द्वारा नियंत्रित हो सकती हैं। इस रिपोर्ट को पढ़ें: http://tiny.cc/Report-NIHFW-SC

  3. गुटखा और पान मसाला निर्माता इस प्रतिबंध से इस आधार पर भागना चाह रहे हैं कि ये उत्पाद भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 के अनुसार वर्णित परिभाषा के अनुसार खाद्य पदार्थ नहीं है तथा इन पर भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 लागू नहीं होता है। वे तर्क देते हैं कि सिगरेट तथा अन्य तम्बाकू उत्पाद (व्यापार व वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति तथा वितरण के नियमन तथा विज्ञापन पर प्रतिबंध) अधिनियम 2003 COTPA के नम से जाना जाने वाला लागू होता है। और इस प्रकार गुटखा और पान मसाला COTPA के अंतर्गत निगमित तो हो सकते हैं किन्तु वे भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 के अनुसार प्रतिबंधित नहीं हो सकते। किन्तु शुक्र है कि उनका यह कुतर्क उच्चतम न्यायालय को प्रभावित करने में असफल रहा। गोदावंत पान मसाला मामले में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि “हम इस बात से सहमत नहीं है कि पान मसाला या गुटखा इस अधिनियम की धारा 2(v) के परिभाषा के अनुसार खाद्य पदार्थों में नहीं आता” इस प्रकार यह क़ानून द्वारा निर्धारित है कि गुटखाऔर पान मसाला खाद्य उत्पाद हैं।

  4. यह तो तय है कि “धुंआ रहित तम्बाकू उत्पाद” के निर्माता इस कानूनी युद्ध में न्यायपालिका के पास पुन: जाएंगे। हालांकि जब तक वे संबंधित उच्च न्यायालय से स्टे ऑर्डर नहीं लाते, नियामक 2.3.4. क़ानून है, इसका अर्थ है जी प्रत्येक राज्य में खाद्य और औषधि प्राधिकरण को इस पर तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

क़ानून की ताकत के अतिरिक्त, नैतिक समर्थन में भी अद्भुत ताकत होती है। संसद के 56 सदस्य, मुख्यमंत्री, राज्यपाल तथा अन्य उच्च पदासीन निर्णय निर्माताओं ने चबाने वाली तम्बाकू के प्रयोग को पूरी तरह बंद करने की अपील पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि राजकमल प्रजापति और रमेश चौधरी जैसे लोग इसके शिकंजे से बच सकें। इस देखें: http://tiny.cc/Anti-Tobacco-Pledges

प्रकाशन के लिए ज्यादा रेसोल्यूशन वाली तस्वीरें यहां से डाउनलोड की जा सकती हैं:

http://tiny.cc/Tobacco-Victims-1

http://tiny.cc/Tobacco-Victims-2

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें आशिमा सरीन, प्रोजेक्ट निर्देशक, VoTV +91-8860786604

Thank you Meenajee Gutkha, our favourite gutka brand

NB Group’s Meenaji Gutka is popular in Uttar Pradesh & Orissa, as these states haven’t yet banned gutka. Gutka brands like Meenajee, Talab, Kamla Pasand & Pan Parag are freely sold. Cancer patients landing up at Tata Memorial Hospital from UP and Orissa frequently report consuming NB Group’s Meenajee Gutkha. This gutka (ready-to-eat chewing tobacco mix) is sold in variations like Meenajee Mawa Masala, Meenajee Priya Gutkha and Meenaji Mix Gutkha. Two patients with oral cancer who came to Tata Memorial from Orissa made special mention of this brand. This is their tribute to their favourite brand, which they have lovingly  consumed for many years.

Civil Society Lauds UP Govt for Hiking Tax on Tobacco Products

VoTV and Voluntary Health Association of India (VHAI), New Delhi and Uttar Pradesh Voluntary Health Association organized a press conference on 11th July, 2012 at UP Press Club, Lucknow. The conference was organized to appreciate the Uttar Pradesh government for sharply hiking taxes on tobacco products.  Health Minister Ahmad Hasan was present.

Ashima Sarin (Project Director, VoTV), VoTV members (Dilip Kumar, Sunil Handa), Binoy Mathew (Media Officer, VHAI), JP Sharma (Executive Director, UPVHA), Dr Sudhir Kapoor (IDA), Prof. Ramakant thanked the Government, Akhilesh Yadav, Jawed Usmani, Ahmad Hasan and others, for raising taxes on tobacco products in Uttar Pradesh.

News Report

Anti-tobacco groups applaud gutka ban in six states

Six states have banned gutka and other chewable tobacco products. The anti-tobacco lobby is calling it a major victory. While the country is fighting the larger battle to ban gutka, Sarfabad in Uttar Pradesh has become the third village to go tobacco free. The Panchayat there decided to ban gutka after several young people succumbed to critical diseases.

A villager, Sukhbir Singh, said, “There is a Rs 1,000 fine on anyone who sells gutka and a Rs 500 fine on anyone who eats it.”

Almost a year since the new Food Safety law banned foods with tobacco and nicotine content, six states have banned gutka, khaini and pan masala.

Madhya Pradesh took the first step followed by Kerala and Bihar. Maharashtra banned both gutka and pan masala. After Himachal Pradesh and Rajasthan, Haryana is expected to ban gutka soon and Goa had already banned it under the public health act.

Public health experts say it is a huge health relief, as India battles 80,000 new oral cancer cases every year.

Pankaj Chaturvedi of Tata Memorial Hospital, said, “India is the highest producer of mouth cancers. Apart from that there are several precancerous conditions like Submucous fibrosis in which the mouth of the person doesn’t open.”

Srinath Reddy of the Public Health Foundation of India said, “It’s not just the nicotine, the heavy metals are particularly dangerous and this has been found to be in high quantities in gutka.”

Till about a year ago, gutka reigned as a Rs 20,000 crore industry. But now the gutka industry is admitting to losses, and argues that gutka should not be considered as food at all.

Sanjay Bechan, Executive Director, Smokeless Tobacco Federation of India, “The industry is deteriorating once the Supreme Court banned packaging. We were reduced to almost 60 per cent of our size and now this ban by states. Since states are banning, we have suffered losses. Gutka is a scheduled tobacco product. So my legal position is very clear, I am not food, I am tobacco. It’s unscientific and undemocratic of the government to ban gutka.”

Yet, 5 million children in India are already addicted to oral tobacco and more than 5,000 start using gutka every day.

Source:

Phone No.:
+91-22-2757 5487
Correspondence Address:

Sambandh Health Foundation, 1st Floor, Polyclinic, Near Rishi Public School, Sector 31, Gurugram 122001