Choose Life, Not Tobacco         |         Smoking is a habit that drains your money and kills your slowly, one puff after another….         |         Smoking helps you to relax… in Death-bed         |         Smoking is injurious not only to you, but for the ones around you also… Quit before it’s late         |         Smoking Leaves an Unseen Scar, it fill your Insides with Toxins and Tar         |         Only a fool would put his lips, at the other end of a burning fie.         |         Irony is, Tobacco companies kill their Best Customers.         |         You’re a Fool, if you think smoking is cool.         |         Tar the Roads, not your lungs.         |         Be brighter, put down the lighter.         |         Put the smoke out, before it put you Out.         |         Who’s going to retire on your hard-earned dollars… You or some tobacco company executive?         |         A Friend in Deed won’t make you smoke that weed.         |         Smokers die young, be smart, don’t start.         |         Every time you light up A cigarette, you are saying that your life isn’t worth Living….        |         Don’t let being on a ventilator ultimate become, the reason you eventually quit smoking. Save lungs while you can.         |         If you can’t stop smoking…. Cancer will.         |         Cigarettes are like Squirrels. They are perfectly harmless until you put one in your mouth and light it on fire.

Category Archives: Cigarette industry

VoTV Healis launches Tobacco Free Education Institutes in Assam

Healis Sekhsaria Institute for Public Health Tata Trust in collaboration with Voice of Tobacco Victims (VoTV), and Dr. B Borooah Cancer Institute did a press conference for launch of Tobacco Free Educational Institutes campaign in Assam.
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Widows of former tobacco users wrote to the Hon’ble Prime Minister of India to implement larger pictorial warning

Voice of Tobacco Victims (VoTV) led a campaign for pictorial warning with Widows of 5 Tobacco Victims writing a letter to Prime Minister of India Mr. Narendra Modi. This was in continuation with the Pictorial warning that VoTV had done by sending a letter with support of 653 doctors writing to PM.
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Doctors and Civil societies write to Prime Minister of India asking for implementation of 85% pictorial warning

Voice of Tobacco Victims (VoTV) on behalf of 653 doctors from all India wrote to the Hon’ble Prime Minister of India and Union Health & Family Welfare Minister to implement 85% pictorial warnings on all tobacco products on 25th March 2016.
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Doctors and civil societies ask for 85% pictorial warning on Tobacco products in Bangalore, Karnataka

Dr. Vishal Rao conducted VoTV in a press conference organized in association with Institute of Public Health demanding the Union Govt to implement 85% Pictorial warning on all tobacco products.
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Dr. Vishal Rao, Dr. Upendra Bhojani of IPH, Ms. Jayna Kothari – Advocate and Dr. Banu Prakash – Neuro Surgeon along with VoTV patient addressed the media in the conference.

VoTV Patrons on the World No Tobacco Day

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On the occasion of World No Tobacco Day patrons from Andhra Pradesh, Arunachal Pradesh, Assam, Bihar, Gujarat, Maharashtra, Manipur, Punjab, Kerala, Rajasthan, Uttar Pradesh conducted various activities in their respective regions.

11 राज्यों ने गुटका एवं पान मसाले पर प्रतिबन्ध लगाना आवश्यक क्यों समझा

10 सितम्बर, 2012, मुम्बई: मिलिये 28 वर्ष के राजकमल प्रजापति से, जो नौकरी करने के साथ साथ बी.एड. की पढाई भी जारी रखे हुए है। वे विवाहित हैं और उनकी दो बेटियाँ हैं, राजकमल उत्तर प्रदेश के नामालूम से जालौन जिले के उरई कस्बे में रह रहे थे जब तक वे कैंसर की चपेट में नहीं आए थे। इस समय राजकमल मुम्बई के टाटा मेमोरिअल अस्पताल में हैं जहां पर उनकी जीभ और टॉन्सिल के काफी भागों को 26 अगस्त 2012 को हटा दिया गया। अब वे रेडियो थेरेपी की चुनौतियों का सामना करने के साथ फिर से बोलना सीख रहे हैं। यह पिछले केवल तीन सालों में उनके लिए गुटखा चबाने और सिगरेट पीने का नतीजा है!

Rajkamal Prajapati of Uttar Pradesh, Gutka Addiction Victim, oral cancer patient

उरई, उत्तर प्रदेश के राजकमल

राजकमल से विपरीत कोलकता में दिहाड़ी करने वाले 65 साल के मजदूर रमेश चौधरी, लगभग चालीस सालों से खैनी खा रहे थे और बीडी पी रहे थे; उनकी पत्नी सविता ने भी शादी के बाद से इसे नियति मां समझकर स्वीकार कर लिया। उन्हें हाल ही में स्वरयंत्र का कैंसर पता चला। दो सप्ताह पहले उनकी घबराई पत्नी सविता उन्हें मुम्बई लेकर आई क्योंकि वह बडी कठिनाई से सांस ले पा रहे थे। 27 अगस्त को टाटा मेमोरिअल के सर्जन ने उसका स्वरतंत्र हटा दिया और अब वह अपने गले में किये छेड़ से सांस लेता है और भविष्य की ओर चिंतिंत रहता है।

Ramesh Chowdhury, Chewable Tobacco Gutka & Bidi victim, Kolkata at Tata Memorial Hospital

कोलकता के रमेश और सविता चौधरी

सविता और राजकमल ने मुख्यमंत्री – ममता बनर्जी तथा अखिलेश यादव – को गुटखे पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए एक चिट्ठी लिखी। कई तम्बाकू पीड़ित भी अब ”वोईस ऑफ़ टोबॅको विक्टिम्स” जो कैंसर सर्जन, अस्पतालों तथा गैर सरकारी संगठनों का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क है, द्वारा प्रोत्साहित होकर मुख्यमंत्रियों तथा सांसदों को पत्र लिख रहे हैं।

कुछ कैंसर सर्जन अपनी पूरी ज़िंदगी में जीभ, जबड़े, स्वरयंत्र तथा तम्बाकू खाने वालों के छाती के अंगों को निकल कर थक चुके हैं जिससे व्यक्ति शारीरिक तथा सामाजिक रूप से विकलांग हो जाता है, जबकि मुनाफ़ा कमाने वाली तम्बाकू कंपनियां उन्हें जहर खिलाना जारी रखे हुए हैं। वे इस तथ्य को पचा नहीं पाते कि अपने पेशे के चक्कर में वे कितनी संख्या में अपंग व्यक्ति पैदा कर रहे हैं।

सर्जन इस तथ्य पर भरोसा ही नहीं कर पा रहे हैं कि आज मुंह से होने वाला कैंसर, इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन बन गया है, यह देश में कैंसर से पीड़ित 42% पुरुषों की मृत्यु का वहीं 18.5% महिला कैंसर पीड़ितों की मृत्यु का कारण बना। ये आंकड़े एक विख्यात चिकित्सीय पत्रिका द लैंसेट में अग्रणी भारतीय सर्जनों द्वारा प्रकाशित एक अनुसंधान पेपर के अनुसार पुरुषों में 84,000 मौतों तथा महिलाओं में 36,000 मौतों की भयावह तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। इस मिथक के विपरीत कि धुआं रहित तम्बाकू सिगरेट की तुलना में कम हानिकारक होती है, यह अध्ययन बतलाता है कि फेफड़े के कैंसर से होने वाले मौतों की तुलना में तम्बाकू से होने वाकी मौतों की संख्या दोगुनी है।

और चूंकि मुंह का कैंसर केवल एक ही मुख्य बीमारी है जिससे तम्बाकू चबाने वाले पीड़ित होते हैं, आंकड़े बतलाते हैं कि तम्बाकू से संबंधित मृत्यु तथा अक्षमताएं उपरोक्त आंकड़ों से कई गुना है।

लगभग 19,000 व्यक्ति भोपाल गैस शोकपूर्ण घटना में मारे गए। तम्बाकू से होने वाली मौतें इन आंकड़ों को भी पार करती हैं। यह बहुत ही खतरनाक तथ्य है कि गुटखा, पानमसाला और ऐसे ही कई उत्पाद हर माह पर एक भोपाल गैस शोकपूर्ण घटना के समान होते हैं, या एक भयानक हवाई दुर्घटना रोज के समान। इन उत्पादों को अपना चेहरा देने वाले मलाइका अरोड़ा और संजय दत्त जैसे खूबसूरत लोगों से एकदम विपरीत, ये सर्जन मृत और मरते लोगों को देखते हैं या उन लोगों को जिनकी ज़िंदगी बचाने के लिए उनके जबड़े, जीभ या गालों को हटा दिया है।

अब पूरे भारत में 47 चिकित्सीय पेशेवरों का एक नेटवर्क है जो गुटखा, पानमसाला और अन्य जहरीले उत्पादों को सड़क से फेंकने के लिए कटिबद्ध है और उन्हें इतिहास की किताबों या अजायबघर में में ही रखे जाने के लिए कुछ भी करने के लिए प्रतिबद्ध है। कुछ संपर्क विवरण दिए हैं: http://tiny.cc/Anti-Tobacco-Surgeons

कैंसर सर्जनों की आँखों के माध्यम से और तस्वीरें: http://tiny.cc/Cancer-surgeons-gutka

Gutka Tobacco Zarda Chaini Khaini Baba RMD Sanjay-Dutt Malaika Glamour

What the Common Man thinks of Gutka or Chewing Tobacco — Celebs like Sanjay Dutt Malaika

Gutka Tobacco Zarda Chaini Khaini Baba RMD Cancer

What a Cancer Surgeon sees about Gutka Zarda Khaini & other forms of chewing tobacco


कैंसर सर्जन अब अपनी पूरी ताकत हर राज्यों से इन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने पर कर रहे हैं। और नतीजे दिख भी रहे हैं। कड़ी राजनीतिक इच्छा शक्ति का परिचय देते हुए 11 प्रदेश और एक केन्द्र शासित प्रदेश ने गुटखा और अन्य तम्बाकू से संबंधित उत्पाद प्रतिबंधित कर दिए हैं। ये हैं : मध्य प्रदेश, केरल, बिहार, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात और पंजाब तथा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ। दिल्ली प्रशासन भी दिल्ली उच्च न्यायालय के प्रति प्रतिबद्ध है कि वह कुछ दिनों में उचित निर्णय लेगा।

कुछ प्रतिबंध आदेशों को पढ़े http://tiny.cc/State-Tobacco-Bans

चबाने योग्य तम्बाकू पर प्रतिबंध का कानूनी आधार:

  1. स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 1 अगस्त 2011को जारी अधिसूचना के बिंदु 2.3.4 (भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक प्राधिकरण) में कहा गया है “उत्पादों में कोई भी ऐसा पदार्थ नहीं होना चाहिए हो स्वास्थ्य के प्रति हानिकारक हो: तम्बाकू और निकोटीन को किसी भी खाद्य प्रदार्थ का हिस्सा नहीं बनना चाहिए” इस प्रकार सभी धुंआ रहित तम्बाकू उत्पादजैसे गुटका, खैनी आदि पर प्रतिबंध लगना चाहिए। यह भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 के अनुसार हैं तथा भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक प्राधिकरण, स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत हैं।

  2. उच्चतम न्यायालय में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राष्ट्रीय संस्थान द्वारा जमा की गई रिपोर्ट भारत में धुँआ रहित तम्बाकू की वजह से होने वाली हज़ारों लोगों की मृत्यु की भयावह तस्वीर को प्रस्तुत करती है। ये सभी बीमारियाँ केवल ऐसे उत्पादों की बिक्री के प्रतिबंध द्वारा नियंत्रित हो सकती हैं। इस रिपोर्ट को पढ़ें: http://tiny.cc/Report-NIHFW-SC

  3. गुटखा और पान मसाला निर्माता इस प्रतिबंध से इस आधार पर भागना चाह रहे हैं कि ये उत्पाद भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 के अनुसार वर्णित परिभाषा के अनुसार खाद्य पदार्थ नहीं है तथा इन पर भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 लागू नहीं होता है। वे तर्क देते हैं कि सिगरेट तथा अन्य तम्बाकू उत्पाद (व्यापार व वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति तथा वितरण के नियमन तथा विज्ञापन पर प्रतिबंध) अधिनियम 2003 COTPA के नम से जाना जाने वाला लागू होता है। और इस प्रकार गुटखा और पान मसाला COTPA के अंतर्गत निगमित तो हो सकते हैं किन्तु वे भारतीय खाद्य सुरक्षा तथा मानक अधिनियम 2006 के अनुसार प्रतिबंधित नहीं हो सकते। किन्तु शुक्र है कि उनका यह कुतर्क उच्चतम न्यायालय को प्रभावित करने में असफल रहा। गोदावंत पान मसाला मामले में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि “हम इस बात से सहमत नहीं है कि पान मसाला या गुटखा इस अधिनियम की धारा 2(v) के परिभाषा के अनुसार खाद्य पदार्थों में नहीं आता” इस प्रकार यह क़ानून द्वारा निर्धारित है कि गुटखाऔर पान मसाला खाद्य उत्पाद हैं।

  4. यह तो तय है कि “धुंआ रहित तम्बाकू उत्पाद” के निर्माता इस कानूनी युद्ध में न्यायपालिका के पास पुन: जाएंगे। हालांकि जब तक वे संबंधित उच्च न्यायालय से स्टे ऑर्डर नहीं लाते, नियामक 2.3.4. क़ानून है, इसका अर्थ है जी प्रत्येक राज्य में खाद्य और औषधि प्राधिकरण को इस पर तत्काल प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

क़ानून की ताकत के अतिरिक्त, नैतिक समर्थन में भी अद्भुत ताकत होती है। संसद के 56 सदस्य, मुख्यमंत्री, राज्यपाल तथा अन्य उच्च पदासीन निर्णय निर्माताओं ने चबाने वाली तम्बाकू के प्रयोग को पूरी तरह बंद करने की अपील पर हस्ताक्षर किए हैं, ताकि राजकमल प्रजापति और रमेश चौधरी जैसे लोग इसके शिकंजे से बच सकें। इस देखें: http://tiny.cc/Anti-Tobacco-Pledges

प्रकाशन के लिए ज्यादा रेसोल्यूशन वाली तस्वीरें यहां से डाउनलोड की जा सकती हैं:

http://tiny.cc/Tobacco-Victims-1

http://tiny.cc/Tobacco-Victims-2

अधिक जानकारी के लिए कृपया संपर्क करें आशिमा सरीन, प्रोजेक्ट निर्देशक, VoTV +91-8860786604

Thank you ITC Wills Cigarettes! Thank you Pehelwan Bidis! We love this Lifestyle!

Deepak Kumar, a lifelong smoker of ITC’s Wills cigarettes, and Mohammad Azazur Rehman, who has smoked Pehelwan chaap bidis all his life, are now appreciating the brand choices and lifestyle choices that have made their lives so sweet! Both Deepak and Azazur come to Tata Memorial Hospital for quarterly checkups — a lifelong reminder that one must reluctantly live with the lifestyle choices that one willingly makes early in life! And so the duo use ITC Classmate Notebooks & ITC Classmate Stationery to track their dates at Tata Memorial. It’s a good idea to write ones wills early while smoking Wills, jokes Deepak, a former commissioner of Central Excise! Deepak now wears a fashionable scarf to cover that designer hole in the throat (it’s the Wills Classic look!), and he plans to walk the ramp at Wills Fashion Week 2013 as a model to show off his exquisite range of designer scarves & exclusive fashion accessories! He hopes to open a store sponsored by ITC Ltd, naturally. ITC Wills Lifestyle Stores, Organizers of Wills Fashion Week, hope you are listening? Mr Y C Deveshwar, Sir, surely, you will not disappoint an ardent fan of ITC brands, who makes it a point to stay at ITC Hotels whenever he travels?

ITC Wills Cigarettes & Pehelwan Bidis a lifestyle choice & fashion statement!

Cancer patient’s tribute to Pehelwaan Chaap Bidi, his favourite brand!

Mohammed Azazur Rahman, an electrical engineer from Basti district of Uttar Pradesh, was forced to come to Mumbai’s Tata Memorial Hospital last month. It turned out that he was a great fan of Pehelwan brand of bidis all his life, smoking 2-3 packs per day. Today, his disfiguring oral cancer is painfully evident, but he still can’t kick the habit! He smokes 4-5 Pehelwan bidis every day.

Mohd Azazur Rahman, an electrical engineer from Basti district of Uttar Pradesh, loves Pehelwan brand bidis.

Mohd Azazur Rahman, an electrical engineer from Basti district of Uttar Pradesh, loves Pehelwan brand bidis. He has oral cancer, but he still can’t quit the habit!


Late Minister’s Wife writes to TOI & HT Editors: Gutka Ads are Misinforming Readers

3 October 2012, Mumbai: Dear Sir, In the past few days, readers of the Mumbai and Delhi editions of your esteemed dailies have been targeted by a front-page advertisement issued by the gutka manufacturers’ lobby. I would like to caution you that not only is this ad full of lies and half-truths, but also, it constitutes an in-your-face contempt of court. Through this ad, the gutka industry seeks to raise an outcry against the judgments of six High Courts, including Bombay and Delhi High Court, that have ruled in favour of the ban. Sir, are you aware that by publishing this ad, you are unwittingly made into accomplices in openly defying the judiciary? Have you considered the possibility of Contempt of Court notices being issued against your newspapers and you personally?

Let me introduce myself. I am Mrs Sumitra Pednekar, wife of Maharashtra’s former home and labour minister Satish Pednekar, who died of oral cancer last year. My husband’s illness happened because of his addiction to mawa, a mix of chewing tobacco and pan masala. In his last few months, my husband could not swallow even watery dal-khichdi. My daughters and I are still struggling to come to terms with the scars left by his extended illness and tragic demise.

 

This ad that you have been publishing appears to be a last-gasp effort of this industry to get popular support for an unjust and inhuman industry that has made many victims like myself. Below is our rebuttal to the untruths that the ad seeks to spread. We urge you to carry this rebuttal prominently to counter the misinformation spread by the ad:

1) This ad claims, “14 states in India believe that cigarettes are healthy”. This is patently untrue because cigarettes sold everywhere are forced to prominently carry a statutory pictorial warning that states that cigarette smoking is injurious to health. There is no state in India where cigarettes are considered “healthy”.

2) The ad argues, “Gutka with lesser tobacco is banned in 14 states, while cigarettes which have more tobacco are not.” This is a deeply flawed argument. Gutka and cigarette are governed by two different legislations. Gutka is a food product containing tobacco, and cigarettes are not a food product. The sale of gutka has been banned under the Food Safety Act 2006 and Food Safety Regulations, whereas cigarettes and bidis are not governed under this act, as they are not food products. They are governed by the provisions of COTPA (Cigarettes & Other Tobacco Products Act). The gutka manufacturers have tried hard to have it classified as “not a food”, but unfortunately for them, gutka was defined as food item by Supreme Court in the Ghodavat Pan Masala case. The license for manufacturing gutka is issued by the food ministry. So, the gutka manufacturers are trying to mislead people by equating gutka (a toxic food product) with cigarette/bidi (a harmful tobacco product that cannot be eaten). Please note, there is no ban on tobacco, which is simply an agricultural crop and a naturally occurring plant material. However, there is a ban on adding this plant material into any food meant for human ingestion, because it is toxic. Food Safety Act bans adding known toxins in food.

3) The ad claims, “One pouch of gutka contains 0.2 g of tobacco, compared to 0.63 g in one cigarette”. This statistic tries to imply that less tobacco is safer. That is incorrect. There is no safe level of tobacco consumption, and it is harmful in any quantity and in all forms. This fact is well recognized by Govt. of India, which is doing a lot to minimize its consumption in all forms.

4) The ad claims, “A cigarette has 4000 chemicals, as opposed to 3000 in smokeless tobacco”. This is a meaningless statistic thrown at half-literate people to mislead them. It has no scientific basis whatsoever.

5) The ad claims, “Unlike cigarettes, gutka is not harmful for others around you”. This is an effort to obfuscate the issue of gutka ban with the second-hand smoking issue. It implies that consuming gutka is a “victimless crime”, and that the gutka-eater is not harming anyone in society. That is untrue. When a person consuming gutka suffers from oral cancer, his entire family is the sufferer; who should know this better than I? In many cases, the cheeks, upper and lower jaws of the gutka consumer are removed. Such a person is unable to eat or speak normally, and must overcome many hurdles to function as in society and in any occupation. The spouse of the gutka addict is a victim of his consumption in economic and social terms. Every gutka addicts who contracts oral cancer creates 4-5 scarred victims created in his family, for whom life will never be the same again. There is no complete cure. Even after surgery and treatment, such people and their families live in the lifelong fear of recurrence. Tata Memorial Hospital is full of such victims, queuing up for treatment and post-surgical checkups.

6) Lastly, the ad claims, “Thousands of small gutka manufacturers are being shut down by the powerful lobby of cigarette companies”. The effort here is to paint the powerful and influential gutka lobby in the colours of a victim. It is most emphatically not a victim, but the perpetrator of a crime against humanity that is at long last being curbed. The in states gutka bans are not happening because of the cigarette lobby, but because of a central legislation, namely the Food Safety Act 2006, which is simply being implemented by the states. It is happening because the government is simply doing its mandated duty to improve the nutritional status of its citizens, by preventing adulterants and toxic substances from being added into foods.

May we once again remind you that the ban on gutka has been imposed after the High Courts of Rajasthan, MP, Bihar, Kerala, Bombay and Delhi applied their mind to the gutka manufacturers’ pleas for stay on the ban, and rejected their pleas? By challenging this ban through advertisements, the gutka manufacturers are treading on extremely dangerous territory… and so are you. In the interest of your readers, and in your own interest, we would urge you not to publish such ads.

With Best Wishes,
Sumitra Satish Pednekar

Jammu & Kashmir MLAs Sensitized to Tobacco & Gutka

Voluntary Health Association in collaboration with Voice of Tobacco Victims organized an MLA sensitization program in Srinagar on July 18, 2012. Hon’ble Chief Minister and the Speaker chaired the session and there were 40 legislative members. Dr Pankaj Chaturvedi, Oncologist from Tata Memorial Hospital, conducted a VoTV event. Seema Gupta from Voluntary Health Association of India gave presentation on issues of tobacco in J&K. The CM and Speaker assured support for tobacco control and to save lives in J&K.

Phone No.:
+91-22-2757 5487
Correspondence Address:

Sambandh Health Foundation, 1st Floor, Polyclinic, Near Rishi Public School, Sector 31, Gurugram 122001